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पुलिस के शेरलॉक होम्स ने 26 साल में सुलझाए 700 मिसिंग केस

मुंबई : गुमशुदगी के मामलों में हेड कॉन्स्टेबल राजेश पांडेय मुंबई पुलिस का सबसे विश्वसनीय चेहरा हैं। वेश बदलकर वह अब तक 700 मिसिंग केस को सुलझा चुके हैं। उनके काम से प्रभावित होकर एक फिल्ममेकर ने उन पर फिल्म बनाने का फैसला किया है और पुलिस विभाग से इसके लिए इजाजत भी मांगी है। राजेश पांडेय ने कुछ साल पहले एक केस सुलझाया था, जिसमें एक नाबालिग लड़के को उसके पिता ने आपसी रंजिश में किडनैप कर लिया था। मामला 2011 का है। तभी से राजेश पांडेय देश के अलग-अलग हिस्सों में दार्जिलिंग से लेकर दिल्ली तक यात्रा करके गुमशुदगी के केस सुलझा चुके हैं। वह लगातार गुमशुदा लोगों की तलाश कर उन्हें सुरक्षित घर वापस पहुंचाने के काम में जुटे हैं।

52 वर्षीय कॉन्स्टेबल ने बताया, 'लापता लोगों के मामले, खासकर जो बच्चों से जुड़े हों, उन्हें सुलझाना मेरे लिए एक अपराध की जांच करने से भी ज्यादा जरूरी है।' मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर दत्ता पडसलगिकर भी राजेश पांडेय के काम करने के तरीके से बेहद प्रभावित हैं। इस वजह से उन्होंने इसे 'पांडेय मॉड्यूल' नाम दिया है। इसका मतलब है कि कोई भी पुलिस अधिकारी जो गुमशुदगी के मामलों की जांच कर रहा हो, उसे राजेश पांडेय के तरीके से मामले को सुलझाना चाहिए। 2014 में एक घरेलू नौकरानी के लापता होने का मामला सामने आया। राजेश पांडेय को केस की जांच सौंपी गई थी। राजेश पांडेय ने बताया, 'मामले में कोई सुराग नहीं मिल रहा था लेकिन कुछ दिन बाद नौकरानी ने खुद अपनी मालकिन को कॉल किया था। हमने फोन नंबर को ट्रेस किया तो यह बंगाल के 24 परगना जिले का निकला।'

हेड कॉन्स्टेबल अपने साथियों के साथ बंगाल गए लेकिन फोन नंबर पर रजिस्टर्ड पता अस्पष्ट निकला। राजेश पांडेय ने बताया, 'मैंने मालकिन को कॉल किया और एक सलाह दी। मैंने उनसे कहा कि जिस नंबर से कॉल आया था, उसी पर दोबारा कॉल करें और शख्स को बोलें कि एक कूरियर कंपनी को गिफ्ट पार्सल भेजना है और इसके लिए पूरे पते की जरूरत है। उन्होंने ऐसा ही किया और मैं एक डिलिवरी बॉय बनकर उस घर में गया।' राजेश पांडेय ने वहां देखा कि उस मेड की जबरन शादी कराई जा रही है और अपने पैरंट्स से बात करने से रोका जा रहा है। वह अपनी टीम के साथ उसे वहां से रेस्क्यू करके सुरक्षित मुंबई वापस ले आए। राजेश पांडेय मामलों को सुलझाने के लिए अपने सोशल नेटवर्क का भी इस्तेमाल करते हैं। टेलर, गेस्ट हाउस मालिक, होटल और बार कर्मचारियों के बीच उन्होंने अपनी अच्छी पकड़ बना ली है, जो उनके लिए विश्वसनीय सूत्र का काम करते हैं।

हेड कॉन्स्टेबल पांडेय अपने 26 साल के करियर में तीन पुलिस स्टेशन में काम कर चुके हैं और 2005 से दर्ज एक मामले को छोड़कर लगभग सभी गुमशुदगी के मामलों को सुलझा चुके हैं। उन्होंने बताया, 'अंधेरी से एक 14 साल की लड़की के लापता होने का केस नहीं सुलझ पाया है। वह इससे पहले भी दो बार लापता हो चुकी है लेकिन हम हर बार उसे सुरक्षित वापस ले आए। उम्मीद है कि इस बार भी हम उसे बचा लेंगे।



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