बाज़ार में बांग्लादेशी मजदूरों का बढ़ता दबदबा
नवी मुंबई। नवी मुंबई के मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति के फल और सब्जी बाजार मंडी में बांग्लादेशी मजदूरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है. जिसके कारण बाजार के मराठी सहित अन्य माथाडी श्रमिकों का रोजगार ठप हो गया है. सूत्रों के मुताबिक अकेले फल बाजार में ही 50 फीसदी से अधिक बांग्लादेशी कामगार कार्यरत हैं. ये मजदूर बाजार समिति में पंजीकृत भी नहीं हैं. कार्य कर रहे मजदूरों की जानकारी प्रशासन द्वारा व्यापारियों से मांगी जाती है. लेकिन सही जानकारी प्रशासन को नहीं दी जाती है. बाजार में बनावटी मजदूरों के साथ-साथ बांग्लादेशी मजदूरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इन मजदूरों का आवास भी बाजार में होता है. ये मजदूर कोई भी काम कर रहे हैं, चाहे उन्हें जो भी वेतन मिले. इससे माथाडी बोर्ड में पंजीकृत माथाडी श्रमिकों का काम पर प्रभाव हुआ है. माथाडी नेता नरेंद्र पाटिल ने कहा, इन बांग्लादेशी श्रमिकों पर प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है. उन्होंने हाल ही में इस मुद्दे पर गृह मंत्री का ध्यान खिंचे है।
मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभी पांच बाजार परिसरों में, माथाडी मजदूर माल की आवाजाही में शामिल हैं. फल और सब्जी मंडियों में बांग्लादेशी श्रमिक बाजार का अधिकांश काम कर रहे हैं. ये बांग्लादेशी मजदूर कम वेतन में यही काम कर रहे हैं. इसलिए व्यापारी इन श्रमिकों को काम पर रख रहे हैं. नतीजन यहां के रिकॉर्ड में माथाडी के मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आजीविका ठप हो गयी है. कई व्यापारी इन मजदूरों को गालों में रहने की जगह देकर और कम पैसे में हमाली या अन्य काम करवाकर उनका फायदा उठा रहे हैं. बाजार के गाले केवल व्यापारियों को कृषि उपज का व्यापार करने के लिए दिए जाने के बावजूद यहां रहने वाले बांग्लादेशी मजदूर अवैध रूप से गैस सिलेंडर का उपयोग करके वंही खाना बनाते हैं. कुछ बांग्लादेशी दोपहर तक हमाली का काम करते हैं और शाम को फल मंडी के बाहर फुटपाथ पर फल, सब्जियां और अन्य सामान बेचते हैं. कई बार ये कर्मचारी आपस में बहस कर चुके हैं और झड़प की घटनाएं भी हो चुकी हैं. फल बाजार नशीले पदार्थों की बिक्री का अड्डा बन गया है. इस संबंध में पुलिस कई बार कार्रवाई कर चुकी है।