उरण बाईपास मार्ग के लिए नागरिको को करना होगा और इंतजार
पनवेल। उरण शहर के यातायात की भीड़ से राहत देनेवाले उरण बाईपास मार्ग में नगर परिषद सीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण की समस्या निर्माण हुई है. इसके लिए आवश्यक निधी उपलब्ध नहीं होने से उक्त मार्ग पूरा होने में वर्ष 2025 भी लगने की संभावना है. ऐसे में उरण के यात्रियों और नागरिकों को इस मार्ग के लिए अभी कुछ महीने और इंतजार करना होगा।
उरण शहर और उसके आसपास का शहरीकरण तेजी से हो रहा है. उरण स्थानीय, सड़क, जलमार्ग से जुड़ा हुआ है. परिणामस्वरूप शहरी जनसंख्या में वृद्धि होने लगी है. इससे शहर में वाहनों के कारण यातायात की भीड़ बढ़ गई है. उरण के सभी मार्गों पर लगातार गतिरोध के कारण यात्रियों, नागरिकों और वाहन चालकों को परेशानी हो रही है. नागरिकों की मांग है कि इस सड़क को जल्द से जल्द पूरा किया जाए.
वर्ष 2001 से प्रस्तावित
पहली गठबंधन सरकार के दौरान, उरण शहर में यातायात की भीड़ के समाधान के लिए शहर को जोड़ने वाली उरण-पनवेल मुख्य सड़क के साथ मोरा मार्ग को जोड़ने के लिए उरण बाईपास मार्ग वर्ष 2001 में प्रस्तावित किया गया था. इसका भूमि पूजन भी हुआ, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ. उसके बाद 2008 में उरण उत्कर्ष समिति के अध्यक्ष गोपाल पाटिल ने तत्कालीन पालक मंत्री सुनील तटकरे के माध्यम से सिडको के निधी से एक बाहरी बाईपास मार्ग का प्रस्ताव तैयार किया. लेकिन इस मार्ग में मैंग्रोज होने के कारण अनुमती मिलने में कई साल लग गए. परिणाम स्वरूप इस मार्ग की लागत भी बढ़ गई. आज इस बाईपास पर 27 करोड़ की लागत आई है।