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पंखे से लटकता मिला किडनी रैकिट का पर्दाफाश कराने वाले युवक का शव, जांच में जुटी पुलिस

ठाणेः  पवई में एक किडनी रैकिट का पर्दाफाश कराने में मदद करने वाले 25 वर्षीय युवक का शव उसके कमरे में पंखे से लटकता मिला। उत्तर प्रदेश के रहने वाले सुंदर बलवंत सिंह ठाणे में पावभाजी की दुकान चलाते थे। उन्होंने साल 2016 में हीरानंदानी अस्पताल में किडनी रैकिट का पर्दाफाश करने में पवई पुलिस की मदद की थी। सुंदर के एक जानने वाले का मानना है कि वह आत्महत्या नहीं कर सकते। पुलिस पारिवारिक कारणों को आत्महत्या की वजह मान रही है। 

पहली नजर में आत्महत्या का मामला लेकिन जांच जारी 

दिवा आगासन रोड के ओम साईं अपार्टमेंट में रहने वाले सुंदर बलवंत सिंह ने एक बिचौलिए की मदद से दिल्ली के एक मरीज को अपनी किडनी बेची थी। इसके लिए 5 लाख रुपये की कीमत सुंदर को देने की बात तय हुई थी लेकिन यह पैसे उन्हें कभी नहीं मिले। इसके बाद से ही सुंदर ने अस्पताल को एक्सपोज करने के लिए पेपर्स इकट्ठे करने शुरू कर दिए थे। ठाणे पुलिस ने बताया कि अभी वह इस बारे में श्योर नहीं है कि यह आत्महत्या है। पुलिस का कहना है कि सुंदर के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और घटनास्थल पर किसी की जबरन एंट्री का भी कोई संकेत नहीं मिला है। 

पहले भी मिली थी जान से मारने की धमकी 

पुलिस के मुताबिक सुंदर की मौत तीन या चार दिन पहले ही हो गई थी। ऐसा लग रहा है कि पारिवारिक वजहों से आत्महत्या की गई है लेकिन फिर भी मामले की जांच की जा रही है। सुंदर ने पहले भी जान से मारने की धमकी मिलने का दावा किया था। इस वजह से वह कई दिनों तक छिपे हुए भी थे। इंडियन नैशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने आत्महत्या के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह एक मजबूत लड़का था जो शक्तिशाली लोगों के खिलाफ खड़ा था। उन्हें इस बात का संदेह है कि उसने आत्महत्या की होगी। गुप्ता ने साल 2016 में रैकिट के खिलाफ केस दर्ज कराने में सुंदर की मदद की थी। 

पत्नी से झगड़े के बाद घर जाने वाला था सुंदर 

गुप्ता ने आगे कहा कि सुंदर हीरानंदानी किडनी रैकिट केस का सबसे बड़ा विटनेस था। उसकी जान को खतरा था इसलिए उसने पवई पुलिस थाने से प्रोटेक्शन की भी मांग की थी। ठाणे पुलिस के पीआरओ सुखदा नारकर ने बताया कि सुंदर पिछले 18 महीनों ने इस अपार्टमेंट में रह रहा था और एक पाव भाजी का स्टाल चलाता था। प्राथमिक जांच में पता चला है कि 1 जनवरी को उसका पत्नी से झगड़ा हुआ था और 3 जनवरी को उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। वह अपने घर जाना चाहता था। 

साल 2016 का है मामला 

बता दें कि 14 जुलाई 2016 को पवई पुलिस ने हीरानंदानी अस्पताल में एक किडनी ट्रांसप्लांट को बीच में ही रोक दिया जब उसे पता चला कि किडनी प्राप्तकर्ता ने गलत पेपर सबमिट किए हैं। सूरत के ब्रिजकिशोर जायसवाल ने पेपर्स में बताया था कि किडनी डोनर शोभना ठाकुर उनकी पत्नी हैं। इस मामले में जांच के दौरान पुलिस ने 5 डॉक्टरों सहित 14 लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने अक्टूबर 2016 में हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की जिसके कुछ महीनों बाद जायसवाल की मौत हो गई। 



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