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महंगी हुई शराब, पर ज्यादा पी गए जनाब

मुंबई ; हुई महंगी बहुत शराब, थोड़ी-थोड़ी पिया करो... शायरी की यह लाइन महफिलों में भले ही रंग जमाती है, लेकिन महाराष्ट्र में शराब की खपत को इससे कोई वास्ता नहीं है। राज्य में शराब से होने वाली आय ने पुराने सभी रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आलम यह है कि शराब से होने वाली आय लक्ष्य से भी करीब 17 प्रतिशत ज्यादा हुई है। बावजूद इसके सरकार ने शराब पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। हवाला दिया जा रहा है कि सन 2013 के बाद पहली बार शराब पर आबकारी टैक्स में बढ़ोतरी की जा रही है। 

राज्य सरकार ने शराब से साल 2017-18 में 13,449.65 करोड़ रुपये की आय से की थी। मार्च 2018 में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने साल 2018-19 के लिए 15,343.08 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा था। इसमें भी अप्रैल से दिसंबर 2018 तक 9091.29 करोड़ रुपये की आय का टारगेट था, पर टारगेट से कहीं ज्यादा 10,546.16 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। आबकारी विभाग के अधिकारी गर्व से कहते हैं कि भले ही बाजार में मंदी हो, लेकिन शराब के उत्पादन और बिक्री में रेकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। उन्हें चालू वित्त वर्ष में 31 मार्च तक शराब से कमाई में 20 प्रतिशत से ज्यादा कमाई का भरोसा है। 

शराब के उत्पादन के मामले में नासिक, औरंगाबाद, पालघर, अहमद नगर, पुणे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़े बया कर रहे हैं कि राजस्व प्राप्ति के मामले में औरंगाबाद पहले नंबर पर हैं। इस जिले ने महज नौ महीने में शराब से 3,134 करोड़ रुपये सरकारी तिजोरी को दिए हैं। उल्लेखनीय यह है कि औरंगाबाद सूखाग्रस्त क्षेत्र मराठवाडा का हिस्सा है और मराठवाडा में ही किसानों ने बड़ी संख्या में आत्महत्या की हैं। दूसरे नंबर पर नासिक रहा जहां से 1,871 करोड़ रुपये, तीसरे नंबर पर पुणे 1,195 करोड़ रुपये की कमाई की। अहमद नगर जिले से भी सरकार को 1,017 करोड़ रुपये की आय हुई। आबकारी विभाग के अधिकारी कहते हैं कि राज्य में नासिक में वाइन, औरंगाबाद में बीयर और पालघर जिले में देशी व अन्य शराब का उत्पादन होता है। 



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