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फांसी की सजा की पुष्टि में विलंब पर सरकार की खिंचाई

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की यह कहकर काफी खिंचाई की है कि वह काफी 'असंवेदनशील' है, क्योंकि वह अप्रैल 2014 में हुए कुख्यात शक्ति मिल्स गैंगरेप के दोषियों को दी गई फांसी की सजा की पुष्टि करने के लिए शीघ्र सुनवाई करने में विफल रही है। न्यायाधीश एएस ओक और न्यायाधीश एएस गडकरी ने ट्रॉयल कोर्ट से पहले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दे दिया था। लेकिन जून 2014 में महाराष्ट्र सरकार ने याचिका दायर करते हुए दोषियों को दी गई फांसी की सजा की हाई कोर्ट से पुष्टि कराने को कहा था। लेकिन इस मामले की सुनवाई तेजी से नहीं हो पा रही है। उसके बाद सुनवाई दिसंबर 2014 में हुई और फिर इस साल जनवरी में हुई, यानी चार साल बाद। कोर्ट ने कहा कि 'यह महत्वपूर्ण मामले हैं और हम नहीं जानते कि इतने महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की असंवेदनशीलता पर क्या कहा जाए। क्या यह सरकार की ड्यूटी नहीं है कि वह इन मामलों की समय पर सुनवाई कराए।' इस साल सुनवाई की पुष्टि 3 जनवरी को सूचीबद्ध थी, लेकिन दोषियों द्वारा दायर तीन याचिकाओं के चलते सुनवाई नहीं हो पाई। याचिका में उस धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें फांसी की सजा दी गई है। 3 जनवरी को न्यायाधीश ओक की नेतृत्व वाली बेंच ने मुख्य न्यायाधीश के साथ यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि क्या इन याचिकाओं और पुष्टि याचिका को एक साथ सुना जा सकता है। 

मुख्य न्यायाधीश नरेश पाटील ने तब कहा था कि याचिकाओं को पहले सुना और तय किया जाना चाहिए। इससे सजा पुष्टि वाली याचिका की सुनवाई में और ज्यादा विलंब हो गया। लेकिन न्यायाधीश ओक ने शुक्रवार को कहा कि यह सरकार की ड्यूटी है कि वह मुख्य न्यायाधीश को बताए कि इस तरह की अपीलों से सजा की पुष्टि वाली सुनवाई में विलंब होता है और इन्हें तुरंत निपटाया जाना चाहिए। 

अप्रैल 2014 में सत्र न्यायालय ने शक्ति मिल कंपाउंड में एक फोटोजर्नलिस्ट के साथ सामूहिक दुष्कर्म के चार आरोपियों विजय जाधव (19), मोहम्मद कासिम हफीज शेख उर्फ कासिम बंगाली (21), मोहम्मद अंसारी (28)और सिराज खान को दोषी माना था। जाधव, बंगाली और अंसारी को मौत की सजा दी गई, क्योंकि उन्हें जुलाई, 2013 में एक अन्य लड़की के साथ गैंग रेप करने के आरोप में दोषी ठहराया जा चुका है। सिराज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 

आईपीसी की धारा 376(ई) के तहत बार-बार रेप करने पर मौत की सजा का प्रावधान है। लेकिन इस मौत की सजा की हाई कोर्ट से पुष्टि होना बाकी है। विजय जाधव, कासिम बंगाली और सलीम अंसारी को जैसे ही मौत की सजा मिली, उन्होंने उच्च न्यायालय में गुहार लगाते ही इस सजा को चुनौती दी। 



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