हैडलाइन

लापरवाह चालकों के विरुद्ध आरटीओ सख्त

बीते दो महीने में करीब 13 हजार लाइसेंस हुए रद्द

नवी मुंबई : बेलगाम हुए लापरवाह वाहनचालकों के विरुद्ध बड़ी मुहिम छेड़ते हुए आरटीओ ने बीते 2 महीने में करीब 13 हजार ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। ये सभी लाइसेंस 3 महीने के लिए रद्द किए गए हैं। यह जानकारी राज्य के परिवहन आयुक्त शेखर चन्ने ने कलंबोली में आयोजित 30वें सड़क सुरक्षा अभियान की शुरुआत करते हुए दी। इस कार्यक्रम में पनवेल आरटीओ अधिकारी लक्ष्मण दराडे, उपप्रादेशिक परिवहन अधिकारी हेमांगिनी पाटील व नवी मुंबई यातायात पुलिस उपायुक्त सुनील लोखंडे सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

दुर्घटनाओं में 4 प्रतिशत की वृद्धिः कलंबोली के सुधागड हाईस्कूल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में चन्ने ने बताया कि सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में 4 प्रतिशत के औसत से वृद्धि हो रही है। महाराष्ट्र में बीते 30 वर्षों से सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। परिवहन आयुक्तालय और यातायात पुलिस द्वारा हर साल समस्त जनता से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की जाती है। इसके बावजूद बहुत से लापरवाह वाहनचालकों द्वारा यातायात नियमों की अनदेखी की जाती है।

दुर्घटनाओं में कमी मुख्य उद्देश्यः परिवहन आयुक्त शेखर चन्ने ने कहा कि हमारा उद्देश्य वाहन चालकों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है न कि अधिक से अधिक दंड वसूलना। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई हम लापरवाह वाहनचालकों में अनुशासन लाने के लिए करते हैं। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की कोशिशों के बावजूद सिग्नल तोड़ने, शराब पीकर वाहन चलाने, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने, तय मानक से अधिक रफ्तार से वाहन चलाने, चार पहिया वाहनों को बिना सीटबेल्ट लगाए चलाने से सड़कों पर अक्सर जानलेवा व गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं।

राष्ट्रीय क्षतिः परिवहन आयुक्त शेखर चन्ने ने बताया कि सड़कों पर घटित दुर्घटनाओं से बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय क्षति होती है। उन्होंने बताया कि यह देश की जीडीपी का 3 प्रतिशत तक है। इसे यदि रुपये में आंका जाए तो यह अरबों में होगा। इस क्षति को वाहन चालकों द्वारा अनुशासन के पालन के माध्यम से बहुत हद तक रोका जा सकता है। ऐसी स्थिति में देश की तरक्की की रफ्तार और भी तेज हो सकती है।

स्कूली पाठ्यक्रम की जरूरतः परिवहन आयुक्त ने यह भी बताया कि आने वाले समय में सड़कों को दुर्घटना-मुक्त रखने के लिए कई काम करने हैं। इसमें सबसे प्रमुख काम स्कूली बच्चों में जागरूकता फैलाना है। इसीलिए परिवहन विभाग ने राज्य सरकार से कहा है कि यातायात नियमों व इससे जुड़ी जानकारी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि कच्ची उम्र से ही बच्चों को यातायात नियमों को बताया जा सके। सूत्रों के अनुसार इस संदर्भ में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने भी अनुकूल रुख दिखाया है।



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