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जैश के संदिग्ध आतंकी का खुलासा- जैश ने 'होली वॉर' के लिए किया था मजबूर

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्धों से पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. संदिग्धों का कहना है कि जैश ने उन्हें 'होली वॉर' में कूदने के लिए मजबूर कर किया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी इस केस के संबंध में यूपी एटीएस से विवरण मांगा है. जबकि जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक टीम भी पकड़े गए दोनों संदिग्धों से पूछताछ करने की तैयार में है. शाहनवाज तेली और आकिब को एटीएस ने गुरुवार को सहारनपुर के देवबंद से गिरफ्तार किया था.

जांच एजेंसियों की पूछताछ के दौरान 31 वर्षीय शाहनवाज ने बताया कि वह एक कॉलेज ड्रॉपआउट है. वो कंप्यूटर कोर्स कर रहा था, जिसे उसने बीच में ही छोड़ दिया था. बाद में उसने कॉलेज छोड़ दिया और वह मौलवी बन गया. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि शाहनवाज का दावा है कि वह 2017 से पहले घाटी में जैश के आतंकियों के संपर्क में आया था. उसका दावा है कि आतंकी उसके गांव में आए थे. और उन्हें धमका कर मदद मांगी थी.

शाहनवाज ने अपने बयान में यूपी एटीएस को बताया कि जैश के आतंकियों ने उसे डराया था. उन्होंने उसे बताया कि वो एक काफिर है और यही वो समय है जब उसे 'होली वॉर' में योगदान देना चाहिए. शाहनवाज के अनुसार कश्मीर में एक शख्स उसे रोजाना मिलता था और उसे निर्देश देता था. बाद में उन लोगों ने यूपी के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की योजना बनाई.

सूत्रों के मुताबिक, जून 2017 में वह कश्मीर छोड़कर उत्तर प्रदेश आ गया और देवबंद में रहने लगा. वो एक छात्र के रूप में वहां रह रहा था. वो विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद की प्रवेश परीक्षा में बैठना चाहता था. यहां तक ​​कि उसने हॉस्टल के अधिकारियों को बताया था कि वह देवबंद में परीक्षा की तैयारी कर रहा था.

हालांकि, जांच के दौरान यूपी एटीएस को पता चला है कि शाहनवाज़ ने यूपी आने के बाद भी परीक्षा में बैठने के लिए कोई तैयारी नहीं की. 2017 और 2018 के रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि उसने परीक्षा के लिए आवेदन नहीं किया था.

ATS का मानना ​​है कि शाहनवाज़ देवबंद में बेस बना रहा था. उनका पहला टारगेट देवबंद के छात्र थे. वह उनसे दोस्ती करता था और उन्हें अपने हॉस्टल के कमरे में बुलाता था. जहां वो उन्हें जिहादी साहित्य भी दिया करता था. युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए उन्हें डिस्टर्बिंग वीडियो भी दिखाता था.

पूछताछ के दौरान 25 वर्षीय आकिब ने एटीएस को बताया कि वह 12वीं पास है. शाहनवाज की तरह उसने भी स्कूल छोड़ कर पुलवामा में धार्मिक शिक्षा लेने का फैसला किया था. उसके पिता एक बाग में काम करते हैं. आकिब का दावा है कि वह देवबंद में शाहनवाज से मिला था. वो उसे कश्मीर से नहीं जानता था. यूपी एटीएस के शीर्ष स्रोत का कहना है कि आकिब के ये बात भी उन्हें संदिग्ध लग रही है. लिहाजा वे अभी भी इसकी जांच कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, शाहनवाज के यूपी आने के ठीक एक साल बाद जून 2018 में आकिब देवबंद आया था. वे दोनों हॉस्टल के एक ही कमरे में रहा करते थे.

ATS के एक अधिकारी ने बताया कि आकिब इस मॉड्यूल का दिखने वाला चेहरा था. वे जैश हैंडलर के संपर्क में थे. और उन्हें भर्ती के बारे में भी अपडेट देते थे. उन दोनों को भर्ती करने और कट्टरपंथी बनाने का लक्ष्य दिया गया था. इसके बाद आकिब को ट्रेनिंग के लिए नई भर्ती किए गए युवाओं को कश्मीर लाने का काम सौंपा गया था.



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