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बलात्कार के मामलों में मृत्युदंड दिया जा सकता है: केंद्र सरकार

मुंबई : केंद्र सरकार ने बार-बार बलात्कार करने वालों को मृत्युदंड देने के उसके फैसले को सही बताया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि 2013 में बलात्कार संबंधी कानूनों में जो बदलाव किए गए, उनका उद्देश्य ऐसे गंभीर अपराधों की रोकथाम करना है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी कोर्ट को उस समय दी जब कोर्ट में शक्ति मिल गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस याचिका में उन्होंने मृत्यु दंड दिए जाने का विरोध किया है। इन तीनों दोषियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 2014 में दी गई मौत की सजा की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट को बताया कि आईपीसी में धारा 376 के तहत जो संशोधन किया गया है, वह काफी विचार-विमर्श के बाद किया गया।
यह धारा बलात्कार के मामलों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि आपराधिक कानून (संशोधन) ऐक्ट, 2013 में जो संशोधन किए गए हैं, वह कतई अंसैवधानिक नहीं है। सिंह ने कहा, ‘बलात्कार एक गंभीर अपराध है, चाहे वह गैर-हिंसक ही क्‍यों न हो। इससे न केवल पीड़ित को शारीरिक नुकसान होता है, बल्कि उससे उसकी आत्मा और मन:स्थित पर चोट पहुंचती है। उसका पूरा व्यक्तित्व प्रभावित होता है।’ उन्होंने आगे कहा कि ऐसे अधिकांश मामलों में पीड़ित आगे ही नहीं आते और शिकायत दर्ज नहीं कराते हैं।
आईपीसी में यह नई धारा जोड़ी गई है, जिसमें मृत्यु दंड की व्यवस्था की गई है। यह धारा उन अपराधों में लगाई जाती है, जब रेप जैसा अपराध बार-बार किया गया हो। 


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