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बॉम्बे हाई कोर्ट का सवाल, चुनाव से 48 घंटे पहले राजनैतिक विज्ञापन पर रोक लगाने से क्यों हिचक रहा चुनाव आयोग?

मुंबई : चुनाव से 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखा था। इस मसले पर टिप्पणी करते हुए गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने आयोग से सवाल पूछा है। कोर्ट ने कहा है कि आयोग इस संबंध में निर्देश जारी करने से क्यों हिचक रहा है? जस्टिस नरेश पाटिल और एनएम जामदा की पीठ मे आयोग से यह सवाल पूछा है। इस बीच आयोग ने कहा है कि वह इस तरह के निर्देश पर विचार कर रहा है और फिलहाल इस विषय में विशेषज्ञों और पक्षों से चर्चा की जा रही है। अदालत ने आयोग के इस जवाब पर टिप्पणी करते हुए फिर पूछा, 'यह विमर्श कब तक चलेगा और आप इस पर कोई निर्णय क्यों नहीं करते। पीठ ने आयोग से कहा कि वह इस संबंध में स्पष्ट आदेश क्यों नहीं जारी करता? अदालत वकील सागर सूर्यवंशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें चुनाव आयोग को सोशल मीडिया पर ‘पेड’ राजनीतिक विज्ञापनों के रूप में ‘फेक न्यूज’ के नियमन का निर्देश देने की मांग की गई। 

बता दें कि चुनाव आयोग ने जनवरी में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट से कहा था कि वह लोगों को मतदान से पहले 48 घंटे की समयावधि के दौरान किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में सोशल मीडिया पर राजनीतिक टिप्पणियां या पोस्ट करने से नहीं रोक सकता। वहीं इसके बाद बीती 9 फरवरी को आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर चुनाव से 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर राजनैतिक पोस्ट पर रोक लगाने संबंधी सुझाव दिए थे। आयोग ने अपने पत्र में लिखा था कि सेक्शन 126 में संशोधन कर पीपल्स ऐक्ट के तहत प्रिंट मीडिया, न्यूज पोर्टल और सोशल मीडिया पर भी चुनाव प्रचार के 48 घंटे पहले बैन लगना चाहिए।



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