दिल्ली : इंटरनेट के बढ़ते चलन के बीच साइबर अपराध में भी तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। खासतौर से सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने वालों के साथ साइबर अपराध कुछ ज्यादा ही देखा जा रहा है। इसमें ‘साइबर बुलिंग’ के मामले इनदिनों तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ो की मानें तो इसमें पिछले साल की तुलना करीब 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आलम यह है कि हर महीने साइबर सेल सहित दिल्ली पुलिस की स्थानीय यूनिट के पास मासिक स्तर पर ऐसी करीब डेढ़ सौ शिकायतें पहुंच रही हैं।
इंटरनेट पर लोगों को परेशान करना, डराना,गाली देना या फिर धमकाकर कर काम करवाना ‘साइबर बुलिंग’ कहा जाता है। इसमें सोशल नेटवर्किंग साइट पर किसी को असभ्य, घटिया सन्देश भेजना। सोशल नेटवर्किंग साइट के चैटरूम का इस्तेमाल कर लोगो को परेशान करना, अश्लील चित्र, वीडियो जैसी सामग्री भेज कर तंग करना शामिल होता है।
- सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी को साझा न करें और किसी भी साइट पर कॉमेंट करते समय निजी जानकारियां फ़ोन नंबर या निवास स्थान का पता न लिखे।
- सोशल नेटवर्किंग साइट पर किसी अनजान व्यक्ति के सन्देश का जवाब न दें, हो सके तो ऐसे व्यक्ति को ब्लॉक कर दे, ब्लॉक करने का विकल्प आज कल हर सोशल प्लेटफार्म में दिया गया है।
- कभी भी आप किसी ऐप या किसी जरूरी जानकारी के लिए अप्रमाणिक वेबसाइट का इस्तेमाल न करें। क्योंकि ऐसे साइट पर डाउनलोड करते वक़्त पूछी गई जानकारी साइबर बुलिंग का कारण बन सकती है।
जाने-माने साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि चूंकि समाज तेजी से डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। ज्यादातर लोग डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा से जुड़ी सावधानी नहीं बरत रहे हैं। इस कारण साइबर अपराधी उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि जो भी लोग डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वे डिजिटल सावधानी का पर पूरा ध्यान रखें।