महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मराठाओं के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा तो कर दी. लेकिन इसके बाद मुंबई हाईकोर्ट में इस आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं से मराठा समाज चितिंत हो गया है. उन्हें इस बात का डर सताने लगा है कि सरकार से मिला आरक्षण पूरी तरह से टिकेगा या नहीं. इसलिए मराठा क्रांति मोर्चा ने राज्य सरकार से जवाबदेही मांगी है. मोर्चे के सदस्यों ने सरकार से कहा कि वे इस आरक्षण के टिके रहने के लिए कोई ठोस कदम उठाए. मोर्चे की ओर से ये भी चोतावनी दी गई कि अगर सरकार ने आरक्षण को लेकर कोई कदम नहीं उठाया तो इसके लिए उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इस दौरान मराठा क्रांति मोर्चे ने ये भी मांग की है कि 14 हजार मराठाओं पर जो अपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें सरकार जल्द वापस ले. बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार का शीतकालीन पूरा सत्र मराठा आरक्षण की भेट चढ़ गया. सत्र में मुख्यमंत्री की ओर से मराठा समाज को 16 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की गई. श्रेय लेने के लिए सत्ता दल और विपक्ष दोनों अपने-अपने तरीके से वाहवाही लूटते नजर आए. लेकिन सरकार के आरक्षण की घोषणा के बाद मराठा समाज को चिंता सताने लगी है. मराठा क्रांति मोर्चा ने इसके सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आरक्षण की हिफाजत करने की मांग की है. मोर्च ने मांग की है कि तमिलनाडू की तर्ज पर आरक्षण अधिनियम 2018 के संविधान के अनुच्छेद 31 ब और 31क की तरह संरक्षण देकर राज्य और केंद्र सरकार मराठा आरक्षण को पूरी तरह से मजबूत करे.