हैडलाइन

पनवेल मनपा क्षेत्र में हाथी रोग दुरीकरण कार्यक्रम की शुरुआत   

पनवेल मनपा क्षेत्र में हाथी रोग दुरीकरण कार्यक्रम की शुरुआत               


पनवेल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय कीटकजन्य रोग नियंत्रण कार्यक्रम चलाई जा रही है. इसके अंतर्गत आयुक्त मंगेश चितले के मार्गदर्शन में मनपा क्षेत्र में हाथी रोग दुरीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है.  इसके तहत पनवेल मनपा में हाथी रोग सर्वेक्षण शुरू किया गया है. साथ ही हाथीपैर मरीजों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये जायेंगे. इसके अलावा आंतरिक प्रजनन सर्जरी के संबंध में मार्गदर्शन किया जाएगा।

हाथीरोग यह एक दुर्लक्षित रोग है जिसमें हाथी पैर एंव अंडवृद्धी के लक्षण दिखाई देते हैं. ये दोनों ही बीमारियाँ सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं. हाथी पैर रोगी में एक निश्चित वृद्धि के बाद, रोगी की गतिशीलता गंभीर रूप से प्रतिबंधित हो जाती है. रोगी स्वतंत्र रूप से घूम नहीं सकता. आंतरिक प्रजनन के लिए अस्पताल में सर्जरी कराने से इस रोग की तीव्रता को निश्चित रूप से कम किया जा सकता है. हाथी रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शहरी स्वास्थ्य केंद्रवार रैंडम सैंपलिंग की गई है. यहां सर्वे रात 8 बजे से 12 बजे और सुबह 6.30 से 9 बजे के बीच किया जाएगा. उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उक्त कार्य क्षेत्र में एक वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए हाथी रोग सर्वेक्षण एवं कीट वैज्ञानिक सर्वेक्षण आयोजित किया जाएगा. हाथी पैर के मरीजों को पैरों में सूजन आने और पैरों की गति पर प्रतिबंध की समस्या होती है, रोगी दूसरों की मदद के बिना चलने-फिरने में असमर्थ होता है.  इससे रोगी को एक प्रकार की विकलांगता प्राप्त हो जाती है.  सरकारी निर्णय के प्रावधानों के अनुसार ऐसे मरीजों की जांच कर जिला शल्य चिकित्सक के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जायेगा. 

कही आप भी तो नही है शिकार ?

1. हाथी रोग यह प्राथमिक अथवा दुय्यम वर्गीकृत एक महत्वपूर्ण स्थिति है. हाथी रोग हाथ, पैर, पेट, सिर और गर्दन और जननांगों में मौजूद और विकसित हो सकता है।

 2. हाथीपैर  रोगियों को उनके पैरों में सूजन की गंभीरता के आधार पर 'शून्य' प्रमाणपत्र दिया जाता है।


 प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दिशानिर्देश


 ग्रेड 1: हरदम शारिरिक कमजोरी 10 प्रतिशत से कम. 

लक्षण: दिन में पैरों में सूजन देखी जाती है लेकिन रात में पैरों में सूजन नहीं रहती है. कभी तो बुखार आता है।

 ग्रेड 2:  हरदम शारीरिक कमजोरी 10 से 39 प्रतिशत

 लक्षण: सूजन दिन-रात एक जैसी रहती है और पैर लाल हो जाते हैं. हरदम बुखार रहता है.


ग्रेड 3: हरदम शारीरिक कमजोरी 40 से 50 प्रतिशत

लक्षण: पैरों के निचले हिस्से के जोड़ों में झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं, लेकिन पैरों को सीधा करने के बाद झुर्रियाँ गायब हो जाती हैं. लगातार बुखार रहना.  पैर की दो अंगुलियों में इस रोग के समान घाव हो जाते हैं।

ग्रेड 4: हरदम शारीरिक कमजोरी 50% से अधिक 

 लक्षण: पैरों पर गांठें बन जाती हैं. लगातार बुखार रहने से दोनों पैरों की उंगलियों के बीच छाले जैसे घाव हो जाते हैं.  पैरों से दुर्गंध आती है।


Most Popular News of this Week

मुंबईच्या महापौर रितू तावडे...

गोरेगाव (पश्चिम) येथील मृणाल गोरे उड्डाण पुलाच्या राम मंदिर मार्ग ते रिलीफ...

धमक्यांना न घाबरता जनतेची...

धमक्यांना न घाबरता जनतेची सेवा सुरूच राहणार; पोलिस आणि महानगरपालिका...

चेंबूरमध्ये ‘तुंबाडची...

सध्या राज्यभरातील चित्रपटगृहांमध्ये प्रेक्षकांची मने जिंकणाऱ्या मराठी...

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा...

भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी Adani Green Energy Limited (AGEL) ने गुजरात के खवड़ा में...

मुंबईकरांनी पाण्याचा...

मुंबई महानगरात १० टक्के पाणी कपात लागू करण्यात आली असून, तिची अंमलबजावणी...

नालेसफाईच्या नावावर...

पावसाळ्यापूर्वी शहरातील नालेसफाई शंभर टक्के पूर्ण झाल्याचा दावा मुंबई...