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शरद पवार बोले- गंभीर मुद्दों से हटाने की कोशिश है सीएए और एनआरसी

मुंबई : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार भी अब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर गए हैं। शरद पवार ने सीएए और प्रस्तावित एनआरसी को केंद्र सरकार की एक चाल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह देश को परेशान कर रहे गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए है। पवार ने यह भी कहा कि आठ अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र को भी नए नागरिकता कानून को लागू करने से इनकार कर देना चाहिए।पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने आगे कहा, 'हमें भय है कि यह कानून भारत के धार्मिक और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकता है।' पवार ने कहा कि एनडीए के सहयोगी दल के शासन वाले बिहार समेत आठ राज्यों ने कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है, महाराष्ट्र का भी रुख यही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य, केंद्र सरकार के आदेश का विरोध करते हैं तो ऐसी आशंका है कि केंद्र इन राज्य सरकारों को बर्खास्त कर सकती है। बिहार के अलावा, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और राजस्थान ने सीएए लागू करने का विरोध किया है। एनसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि सीएए और एनआरसी देश के सामने मौजूद गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने की चाल है। नया कानून देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अल्पसंख्यक बल्कि जो लोग भी देश की एकता एवं प्रगति की चिंता करते हैं, वे सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। इससे सबसे अधिक प्रभावित गरीब लोग होंगे।

पवार ने नए कानून के तहत गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने और श्रीलंका के तमिलों को इससे बाहर रखने के तरीके पर भी सवाल उठाया। पवार ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए केंद्र सरकार समाज का ध्रुवीकरण करेगी। सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और संबंधित पक्षों से बातचीत नहीं कर रही। लोग अपना गुस्सा जाहिर कर सकते हैं और विरोध दर्ज करा सकते हैं लेकिन हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। हमने अपने नेताओं से पहले ही किसी तरह की हिंसा में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है।



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