दिवाले खाड़ी के मछुआरों के सामने आर्थिक संकट
नवी मुंबई। हर साल की तरह इस साल भी दिवाले खाड़ी में बारिश के प्रवाह के साथ आई पत्तो के बेल एंव कचरों के कारण मछुआरों के सामने आर्थिक संकट निर्माण हो गया है।
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भरने का काम शुरू होने के बाद से मछली पकड़ने का संकट बना हुआ है. इसी में हर साल की तरह इस साल भी तलोजा खाड़ी से आने वाले रसायन युक्त पानी और पत्तो के जोड़ो के कारण समस्या बढ़ गई है. नतीजा ये हुआ कि 90 फीसदी मछलियां पहले ही गायब हो चुकी थीं और अब बची हुई 10 फीसदी मछलियां पकड़ना भी संकट में हैं. मछली पकड़ने के लिए पानी में फेंका गया जाल भी इस पान की बेल में फंस जाता है और दिवाले ग्रामीणों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. नाक पकड़कर मुक्के की मार इस स्थिति में दिवाले के ग्रामीण पहुंच गए हैं. पहले तलोजा खाड़ी से आने वाली पत्तो की बेल बारिश के प्रवाह के साथ कोंबडभुजे, तरघर और पनवेल की दिशा में बढ़ती थीं, लेकिन अब वहाँ भराव के कारण वे सीधे दिवाले खाड़ी के तटों पर आ रही हैं. हवाई अड्डे के लिए खाड़ी को भरने से तलोजा एमआईडीसी खाड़ी से आने वाले बरसाती प्रवाह में दीवले गांव के मछुआरों पर एक नया रसायन और कचरों का संकट आ गया है।
कोड-
दिवाले कोलीवाड़ा 100% मछुआरों का कोलीवाड़ा है. नई परियोजनाओं के कारण यह मछुआरा समुदाय ख़तरे में आ गया है. इससे मुख्य रूप से मानसून के मौसम में बारिश के पानी के बहाव में आने वाले पत्तो के बेल एंव कचरों के कारण मछुआरों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
-हेमंत कोली, ग्रामीण