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चुनाव राजस्थान में, रंग जमा है मुंबई में

मुंबई, राजस्थान विधानसभा चुनाव का रंग मुंबई पर भी असर दिखाने लगा है। कहीं वोटों के लिए बैठक हो रही हैं, तो कहीं नोटों से सहयोग करने की बिसात बिछ रही है। मुंबई के कई व्यवसायी भी राजस्थान के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुंबई में राजस्थानी समाज संभवतया अकेला वर्ग है, जिसमें बड़े उद्यमियों से लेकर व्यवसायी व नौकरीपेशा लोग भी अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को हरसंभव सहयोग करते हैं। ऐसे में उम्मीदवार अपने विधानसभा क्षेत्र में वोट मांगने के साथ साथ मुंबई में भी जनसंपर्क कर रहे हैं। बता दें कि राजस्थान के लगभग सभी इलाकों के लोग मुंबई में रहते हैं। हालांकि इनमें मारवाड़, मेवाड़, गोड़वाड़, शेखावाटी और वागड़ के लोग राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। इसी कारण मुंबई में राजस्थान में चुनाव लड़ रहे कई उम्मीदवार मुंबई आकर बैठकें कर रहे हैं। प्रवासी राजस्थानी समाज में लोकप्रियता के मामले में जो बड़े नेता है, उनमें कांग्रेस के अशोक गहलोत, नीरज डांगी, गिरिजा व्यास और बीजेपी के ओमप्रकाश माथुर, गुलाबचंद कटारिया प्रमुख हैं। 

गहलोत और डांगी कुछ समय पहले दो बार मुंबई में अलग-अलग कई बैठकों और कार्यक्रमों के जरिए लोगों से मिलकर गए हैं। माथुर और कटारिया का समर्थक वर्ग भी मुंबई में बहुत बड़ा है, जिनसे वे लगातार संपर्क में हैं। ज्यादातर बड़े नेताओं के व्यक्तिगत संपर्क हर समाज में होने का फायदा उनको और उनकी पार्टी को हर चुनाव में सीधे मिलता रहा है। इसी कारण मुंबई इन दिनों राजस्थान के नेताओं के लिए हॉट स्पॉट बना हुआ है। 

'...इसलिए मुंबई में जुटाते हैं जनसमर्थन' 

राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं, 'सामान्य तौर पर राजस्थान के नेता आर्थिक सहयोग पाने के लिए ही नहीं बल्कि जनसमर्थन जुटाने मुंबई आते हैं। ऐसा इसलिए भी है कि कमाने वाले व्यक्ति की बात अपने घर और गांव में मानी जाती है। ऐसे में यहां की गई अपील का सीधा फायदा राजस्थान में मिलता है।' 

कांग्रेस उम्मीदवार ने मुंबई में खोला चुनाव कार्यालय 

रानीवाड़ा के कांग्रेस उम्मीदवार रतन देवासी ने तो अपना चुनाव कार्यालय भी इसीलिए मुंबई के खेतवाड़ी इलाके में खोला है। मुंबई के जो व्यवसायी राजस्थान में चुनाव लड़ रहे हैं, उनमें कांग्रेस के रफीक मंडेलिया (चुरू) और बीजेपी के ललित ओस्तवाल (बड़ी सादड़ी) पेशे से बिल्डर हैं। बीजेपी के नारायण सिंह देवल (रानीवाड़ा) व पूराराम चौधरी (भीनमाल) के अलावा बीजेपी छोड़कर निर्दलीय मैदान में उतरे जीवाराम चौधरी (सांचोर) मेटल व्यवसायी हैं। बीजेपी के ही अतुल भंसाली (जोधपुर शहर) पेशे से स्टॉक ब्रोकर हैं। कांग्रेस के जसाराम चौधरी (मारवाड़ जंक्शन) उद्यमी हैं। 

टिकट नहीं मिला, पार्टी के लिए जुटा रहे समर्थन 

मुंबई के जिन लोगों को बहुत प्रयासों के बावजूद इस चुनाव में राजस्थान में टिकट नहीं मिला, उनमें आहोर के वर्तमान बीजेपी विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित, सांचोर से कांग्रेस के विधायक रहे हीरालाल बिश्नोई, नाथद्वारा के नवलसिंह सुराणा, रानीवाड़ा के हीराभाई देवासी, सुमेरपुर के हिम्मतसिंह राजपुरोहित, मारवाड़ जंक्शन के खेतसिंह मेड़तिया, सीकर के वाहिद चौहान प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता है, जिनका अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों सहित मुंबई सहित में भी काफी वर्चस्व है। इसी कारण अब वे मुंबई में भी अपनी-अपनी पार्टी के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने में व्यस्त हैं। 



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