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पनवेल के शिक्षण संस्थान चालकों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

पनवेल के शिक्षण संस्थान चालकों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज 


पनवेल। न्यू पनवेल स्थित आदर्श शिक्षण प्रसारक मंडल और ऋषिकेश शिक्षण प्रसारक मंडल के अध्यक्ष सहित अन्य कार्यकारी ट्रस्टियों के विरुद्ध खांदेश्वर पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का मामला बुधवार को दर्ज किया गया है. पनवेल की प्रथम श्रेणी अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.  दिलचस्प बात यह है कि यह शैक्षणिक संस्थान बिना अनुमति या फर्जी दस्तावेजों पर चल रहा है यह समझने में सरकारी सिस्टम को 18 साल लग गया. 18 साल बाद अनाधिकृत यह मामला सामने आने से पिछले 18 सालों में हजारों छात्र इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं. जिसके कारण उन छात्रों की शिक्षा के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है. अध्यक्ष धनराज विस्पुते, सचिव संगीता धनराज देवीदास विस्पुते, कोषाध्यक्ष परिमेला करंजकर, उपाध्यक्ष दिलीप कुमार चव्हाण, सदस्य शोभा दिलीप चव्हाण, महिंद्र देवीदास विस्पुते, स्मिता महिंद्रा विस्पुते, रमेश आत्माराम विस्पुते, वंदना विजय बिरारी, राकेश चंद्रकांत सोनार, मनोज दुर्गादास सोनार,प्रशांत भामरे और विक्रम धूमल इनपर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दस्तावेज बनाकर सरकारी कार्यालयों को धोखा देने और इसके लिए साजिश रचने के आरोप में खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।


पुलिस शिकायत में कहा गया है कि आदर्श शिक्षा प्रसारक मंडल और ऋषिकेश शिक्षण प्रसारक मंडल ने 2006 और 2024 के बीच ठगी की है. सिडको मंडल ने न्यू पनवेल के सेक्टर 15 के प्लॉट नंबर 41 को कामकाजी महिलाओं के लिए बस्तिगृह हेतु इस संस्था को दि थी.  लेकिन शिक्षण संस्थान प्रबंधन ने भूखंड का फर्जी बैनामा कर यह दिखा दिया कि भूखंड शिक्षण संस्थान के लिए खरीदा है. साथ ही कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने इस पर काम करना शुरू कर दिया. इसके अलावा ऋषिकेश शिक्षण प्रसारक मंडल ने देवद का जगह धनराज विस्पुते के नाम पर होने के बावजूद उक्त जगह ऋषिकेश शिक्षण संस्था के नाम पर दिखाकर शिक्षा विभाग के समक्ष मान्यता प्राप्त करते समय फर्जी दस्तावेज दिखाया गया. उसके बाद वहां पर भी विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से फार्मेसी कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, सीबीएसएससी जैसे विभिन्न शैक्षणिक विभाग शुरू किये गये. इसमे भी वहां स्कूल भवन के निर्माण के लिए रायगढ़ कलेक्टरेट और अन्य सरकारी एजेंसियों से कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी.  इसलिए केंद्र और राज्य शिक्षा विभाग एंव अन्य सरकारी विभागों की अनुमति के बिना परिसर का उपयोग करने और शैक्षणिक संस्थान चलाने के लिए यह अपराध दर्ज किया गया है।


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