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दिल्ली में बढ़ा कत्ल का आंकड़ा, बीते साल छोटी-छोटी बातों पर हुए मर्डर

दिल्ली पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद भी राजधानी में कत्ल के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है. दिल्ली पुलिस के सालाना आंकड़ों पर गौर करें, तो हर दो दिन में औसतन तीन लोगों को किसी न किसी कारण मौत के घाट उतार दिया जाता है. कई मामलों में तो बेहद छोटी-छोटी बात पर लोगों की हत्या कर दी गई.

राजधानी दिल्ली में वर्ष 2017 के दौरान 462 कत्ल के मामले सामने आए थे. जबकि इसके मुकाबले 2018 में 477 लोगों की हत्या कर दी गई. इनमें सबसे अधिक 38 फीसदी लोगों को किसी न किसी रंजिश की वजह से मौत के घाट उतार दिया गया. हालांकि हत्या के 86.16 मामलों को दिल्ली पुलिस सुलझाने का दावा कर रही है.

हत्या में इस्तेमाल हथियार की बात करें तो 43 फीसदी लोगों की धारदार हथियार से हत्या की गई, जबकि 19 फीसदी मामलों में गोली मारकर लोगों को मौत के घाट उतारा गया. हत्या के कारणों की बात करें तो बेहद छोटी-छोटी बातों में कुछ लोगों की हत्या कर दी गई.

6 अक्तूबर 2018 को उत्तम नगर इलाके में कुत्ते से टेंपो टकराने पर कुछ युवकों ने टेंपो चालक विजेंद्र की चाकू और पेचकस मारकर हत्या कर दी थी. वही शराब न देने पर 11 नवंबर 2018 को बाबा हरिदास नगर में हत्या और गली में शोर मचाने पर 30 अगस्त को मंगोलपुरी में युवक की हत्या कर दी गई थी. हत्या के इन मामलों में लाख प्रयासों के बाद भी पुलिस 14 फीसदी मामलों को भी सुलझा नहीं पाई.

हालांकि दिल्ली पुलिस के अधिकारी अपनी सफाई में कहते हैं कि वारदातों में हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए इस साल 1540 मामले दर्ज कर 1901 लोगों गिरफ्तार किया गया है. जिनके पास से कुल 1905 पिस्टल और तमंचे आदि बरामद किए गए हैं.

जिन लोगों को बीते साल कत्ल किया गया. उनकी हत्या के पीछे कई कारण निकलकर सामने आए. जिनके मुताबिक निम्न कारणों से साल 2018 में हत्या की वारदातों को अंजाम दिया गया-

साल 2018 में कत्ल की जो वारदातें सामने आईं, उनमें कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया गया. जिनमें हत्या के लिए कातिलों ने ज्यादातर तेज हथियारों का इस्तेमाल किया



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